Supreme Court of India ने 19 जून 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि demarcated और well-maintained footpath पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार (fundamental right) है। Justice P.S. Narasimha और Justice A.S. Chandurkar की बेंच ने कहा: 'चलने का अधिकार Constitution के Part III के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह Article 19(1)(d) के तहत movement के अधिकार से जुड़ा है, साथ ही Article 19(1)(a), (b), (c) और Article 21 से भी।' यह फैसला Maniyar Iliyaz @ Shaik Riyaz vs P. Ayyappan case (2026 INSC 647) में आया। Court ने यह भी कहा कि यदि इस अधिकार का उल्लंघन होता है तो नागरिक restitutionary remedy (हानि पूर्ति का उपाय) की मांग कर सकते हैं।
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Supreme Court: डिमार्केटेड Footpath पर चलने का अधिकार मौलिक अधिकार; Article 19 और 21 से जुड़ा
मुख्य बिंदु
- Supreme Court of India ने 19 जून 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि demarcated और well-maintained footpath पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार (fundamental right) है
- Narasimha और Justice A.S
- Chandurkar की बेंच ने कहा: 'चलने का अधिकार Constitution के Part III के तहत एक मौलिक अधिकार है
- यह Article 19(1)(d) के तहत movement के अधिकार से जुड़ा है, साथ ही Article 19(1)(a), (b), (c) और Article 21 से भी।' यह फैसला Maniyar Iliyaz @ Shaik Riyaz vs P
- Ayyappan case (2026 INSC 647) में आया
- Court ने यह भी कहा कि यदि इस अधिकार का उल्लंघन होता है तो नागरिक restitutionary remedy (हानि पूर्ति का उपाय) की मांग कर सकते हैं
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📎 मूल स्रोत पढ़ें ↗परीक्षा नोट
• SC फैसला (19 जून 2026): footpath पर चलने का अधिकार = मौलिक अधिकार • Bench: Justice P.S. Narasimha + Justice A.S. Chandurkar; Case: 2026 INSC 647 • आधार: Article 19(1)(d) [movement] + Article 19(1)(a,b,c) + Article 21 [जीवन का अधिकार] • Restitutionary remedy: उल्लंघन होने पर नागरिक हानि पूर्ति की मांग कर सकते हैं
